बुद्धि से विवाद करे, इसका उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (मित्रः) सर्वप्रेरक, काम में लगानेवाला दिन का समय (वा) और (रिशादाः) श्रम का भक्षण करनेवाला (वरुणः) रात्रि का समय (संविदानौ) दोनों मिले हुए (एनम्) इस पुरुष को (जरामृत्युम्=जरा–अमृत्युं जरा–मृत्युं वा) स्तुति के साथ अमर, अथवा, स्तुति वा बुढ़ापे से मृत्युवाला (कृणुताम्) करें। (तत्) इसलिये (होता) महादानी और (वयुनानि) सब व्यवस्थाओं को (विद्वान्) जाननेवाला (एनम्) (अग्निः) अग्नि [तेजस्वी परमेश्वर] (देवानाम्) दिव्य पदार्थों वा महात्माओं के (विश्वा=विश्वानि) सब (जनिमा=०–मानि) जन्मविधानों को (विवक्ति) बतलावे ॥२॥
भावार्थभाषाः - जो मनुष्य दिन और रात ईश्वर की आज्ञापालन में लगे रहते हैं, वे ही अन्त में यशस्वी होते हैं और सर्वज्ञ, सर्वान्तर्यामी परमेश्वर उनके हृदय में सब उत्तम-उत्तम व्यवस्थाओं और नियमों को प्रकट करता जाता है ॥२॥