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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
कुप्रयोग त्याग के लिये उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (आपः) हे जलो ! (यत्) जो (वः) तुम्हारी (अर्चिः) दीपनशक्ति है, (तेन) उससे (तम् प्रति) उस [दोष] पर (अर्चत) प्रदीप्त हो, (यः) जो (अस्मान्) हमसे..... म० १ ॥३॥
भावार्थभाषाः - मन्त्र १ के समान ॥३॥
