पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
कुप्रयोग त्याग के लिये उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (आपः) हे जलो (यत्) जो (वः) तुम्हारी (हरः) नाशनशक्ति है, (तेन) उससे (तम्) उस [दोष] को (प्रति हरत) नाश कर डालो, (यः) जो (अस्मान्) हमसे..... म० १ ॥२॥
भावार्थभाषाः - मन्त्र १ के समान ॥२॥
