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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
कुप्रयोग के त्याग के लिये उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (चन्द्र) हे चन्द्र [चन्द्रलोक !] (यत्) जो (ते) तेरी (शोचिः) शोधनशक्ति है, (तेन) उससे (तम्) उस [दोष] को (प्रति शोच) शुद्ध कर दे (यः) जो (अस्मान्) हमसे.... मन्त्र १ ॥४॥
भावार्थभाषाः - मन्त्र १ के समान ॥४॥
