0 बार पढ़ा गया
पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
कुप्रयोग के त्याग के लिये उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (चन्द्र) हे चन्द्र [चन्द्रलोक !] (यत्) जो (ते) तेरी (अर्चिः) दीपनशक्ति है, (तेन) उससे (तम् प्रति) उस [दोष] पर (अर्च) प्रदीप्त हो, (यः) जो (अस्मान्) हमसे..... मन्त्र १ ॥३॥
भावार्थभाषाः - मन्त्र १ के समान ॥३॥
