पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
कुप्रयोग के त्याग के लिये उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (चन्द्र) हे चन्द्र [चन्द्रलोक !] (यत्) जो (ते) तेरी (हरः) नाशनशक्ति है, (तेन) उससे (तम्) उस [दोष] का (प्रति हर) नाश कर डाल, (यः) जो (अस्मान्) हमसे...... मन्त्र १ ॥२॥
भावार्थभाषाः - मन्त्र १ के समान ॥२॥
