0 बार पढ़ा गया
पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
कुप्रयोग के त्याग के लिये उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (सूर्य) हे सूर्य [सूर्यमण्डल] (यत्) जो (ते) तेरी (शोचिः) शोधनशक्ति है, (तेन) उससे (तम्) उस [दोष] को (प्रति शोच) शुद्ध कर दे, (यः) जो (अस्मान्) हमसे..... मन्त्र १ ॥४॥
भावार्थभाषाः - मन्त्र १ के समान ॥४॥
टिप्पणी: ४–सूर्य। अ० १।३।५। हे सरणशील ! हे प्रेरणशील ! आदित्य ! अन्यदुपरिगतम् ॥ २, ३, ४, ५–उपरि व्याख्यातः ॥
