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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
कुप्रयोग के त्याग के लिये उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (सूर्य) हे सूर्य [सूर्यमण्डल !] (यत्) जो (ते) तेरी (हरः) नाशनशक्ति है, (तेन) उससे (तम्) उस [दोष] को (प्रति हर) नाश कर डाल, (यः) जो (अस्मान्) हमसे..... मन्त्र १ ॥२॥
भावार्थभाषाः - मन्त्र १ के समान ॥२॥
टिप्पणी: २–सूर्य। अ० १।३।५। हे सरणशील ! हे प्रेरणशील ! आदित्य ! अन्यदुपरिगतम् ॥ २, ३, ४, ५–उपरि व्याख्यातः ॥
