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आयु॑र॒स्यायु॑र्मे दाः॒ स्वाहा॑ ॥

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

आयु: । असि । आयु: । मे । दा: । स्वाहा ॥१७.४॥

अथर्ववेद » काण्ड:2» सूक्त:17» पर्यायः:0» मन्त्र:4


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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी

आयु बढ़ाने के लिये उपदेश।

पदार्थान्वयभाषाः - [हे ईश्वर !] तू (आयुः) आयु [जीवनशक्ति] (असि) है, (मे) मुझे (आयुः) आयु (दाः) दे, (स्वाहा) यह सुन्दर आशीर्वाद हो ॥४॥
भावार्थभाषाः - ईश्वर ने हमें अन्न, बुद्धि, ज्ञान आदि जीवनसामग्री देकर बड़ा उपकार किया है, ऐसे ही हम भी परस्पर उपकार से अपना जीवन बढ़ावें ॥४॥
टिप्पणी: ४–आयुः। अ० १।३०।३। इण् गतौ–उसि, स च णित्। जीवनम्। जीवनकारणम् ॥