0 बार पढ़ा गया
पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
आयु बढ़ाने के लिये उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - [हे ईश्वर !] तू (बलम्) सामाजिक बल (असि) है, (मे) मुझे (बलम्) सामाजिक बल (दाः) दे, (स्वाहा) यह सुन्दर आशीर्वाद हो ॥३॥
भावार्थभाषाः - परमेश्वर में सब देवता, मनुष्य आदि समाजों का बल है, ऐसा जानकर मनुष्य अपने कुटुम्बी आदि से प्रीति बढ़ाकर सामाजिक बल बढ़ावें ॥३॥
टिप्पणी: ३–बलम्। बल जीवने, दाने, वधे–पचाद्यच्। बलते विपक्षान् हन्तीति। सामान्यशक्तिः। सैन्यम्। सामाजिकं सामर्थ्यम् ॥
