पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
आयु बढ़ाने के लिये उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - [हे परमात्मा !] तू (सहः) पराक्रमस्वरूप (असि) है, (मे) मुझे (सहः) आत्मिक पराक्रम (दाः) दे, (स्वाहा) यह सुन्दर आशीर्वाद हो ॥२॥
भावार्थभाषाः - अनन्त ब्रह्माण्डों का रचक और धारक परमेश्वर पराक्रमस्वरूप है। ऐसा सोचकर विद्यादि उपायों से मनुष्य अपनी आत्मिक शक्ति बढ़ावें ॥२॥
टिप्पणी: २–सहः। षह अभिभवे, क्षमायाम्–असुन्। मानसिकबलम्। पराक्रमः ॥
