नक्ष॑त्रमु॒ल्काभिह॑तं॒ शम॑स्तु नः॒ शं नो॑ऽभिचा॒राः शमु॑ सन्तु कृ॒त्याः। शं नो॒ निखा॑ता व॒ल्गाः शमु॒ल्का दे॑शोपस॒र्गाः शमु॑ नो भवन्तु ॥
नक्षत्रम्। उल्का। अभिऽहतम्। शम्। अस्तु। नः। शम्। नः। अभिऽचाराः। शम्। ऊँ इति। सन्तु। कृत्याः। शम्। नः। निऽखाताः। वल्गाः। शम्। उल्काः। देशोपऽसर्गाः। शम्। ऊँ इति। नः। भवन्तु ॥९.९॥
पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
मनुष्यों को कर्तव्य का उपदेश।
