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द॑श॒र्चेभ्यः॒ स्वाहा॑ ॥

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पद पाठ

दशऽऋचेभ्यः। स्वाहा ॥२३.७॥

अथर्ववेद » काण्ड:19» सूक्त:23» पर्यायः:0» मन्त्र:7


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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी

ब्रह्मविद्या का उपदेश।

पदार्थान्वयभाषाः - (दर्शर्चेभ्यः) दस [दान, शील, क्षमा, वीरता, ध्यान, बुद्धि, सेना, उपाय, दूत और ज्ञान इन दस बलों] की स्तुतियोग्य विद्यावाले [वेदों] के लिये (स्वाहा) स्वाहा [सुन्दर वाणी] हो ॥७॥
भावार्थभाषाः - मनुष्यों को परमेश्वरोक्त ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद द्वारा श्रेष्ठ विद्याएँ प्राप्त करके इस जन्म और पर जन्म का सुख भोगना चाहिये ॥७॥
टिप्पणी: ७−(दशर्चेभ्यः) म०१। दशानां दशबलानां स्तुत्या विद्या येषु वेदेषु तेभ्यः। दानशीलक्षमावीर्यध्यानप्रज्ञाबलानि च। उपायः प्रणिधिर्ज्ञानं दश बुद्धिबलानि वै-इति शब्दस्तोममहानिधौ ॥