पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
ब्रह्मविद्या का उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (रोहितेभ्यः) प्रकट होते हुए धार्मिक गुणयुक्त [वेदों] के लिये (स्वाहा) [सुन्दर वाणी] हो ॥२३॥
भावार्थभाषाः - मनुष्यों को परमेश्वरोक्त ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद द्वारा श्रेष्ठ विद्याएँ प्राप्त करके इस जन्म और पर जन्म का सुख भोगना चाहिये ॥२३॥
टिप्पणी: २३−(रोहितेभ्यः) रुहे रश्च लो वा। उ०३।९४। रुह प्रादुर्भावे-इतन्। प्रादुर्भावशीलेभ्यो धार्मिकगुणयुक्तेभ्यो वेदेभ्यः ॥
