वांछित मन्त्र चुनें
119 बार पढ़ा गया

रो॑हि॒तेभ्यः॒ स्वाहा॑ ॥

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

रोहितेभ्यः। स्वाहा ॥२३.२३॥

अथर्ववेद » काण्ड:19» सूक्त:23» पर्यायः:0» मन्त्र:23


पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी

ब्रह्मविद्या का उपदेश।

पदार्थान्वयभाषाः - (रोहितेभ्यः) प्रकट होते हुए धार्मिक गुणयुक्त [वेदों] के लिये (स्वाहा) [सुन्दर वाणी] हो ॥२३॥
भावार्थभाषाः - मनुष्यों को परमेश्वरोक्त ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद द्वारा श्रेष्ठ विद्याएँ प्राप्त करके इस जन्म और पर जन्म का सुख भोगना चाहिये ॥२३॥
टिप्पणी: २३−(रोहितेभ्यः) रुहे रश्च लो वा। उ०३।९४। रुह प्रादुर्भावे-इतन्। प्रादुर्भावशीलेभ्यो धार्मिकगुणयुक्तेभ्यो वेदेभ्यः ॥