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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
ब्रह्मविद्या का उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (क्षुद्रेभ्यः) सूक्ष्मज्ञानवाले [वेदों] के लिये (स्वाहा) स्वाहा [सुन्दर वाणी] हो ॥२१॥ यह मन्त्र आ चुका है-अ०१९।२२।६॥
भावार्थभाषाः - मनुष्यों को परमेश्वरोक्त ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद द्वारा श्रेष्ठ विद्याएँ प्राप्त करके इस जन्म और पर जन्म का सुख भोगना चाहिये ॥२१॥
टिप्पणी: २१−(क्षुद्रेभ्यः) म०१९।२२।६। सूक्ष्मज्ञानयुक्तेभ्यो वेदेभ्यः ॥
