वांछित मन्त्र चुनें

ए॑क॒र्चेभ्यः॒ स्वाहा॑ ॥

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

एकऽऋचेभ्यः। स्वाहा ॥२३.२०॥

अथर्ववेद » काण्ड:19» सूक्त:23» पर्यायः:0» मन्त्र:20


0 बार पढ़ा गया

पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी

ब्रह्मविद्या का उपदेश।

पदार्थान्वयभाषाः - (एकर्चेभ्यः) एक [परमात्मा] की स्तुतियोग्य विद्यावाले [वेदों] के लिये (स्वाहा) स्वाहा [सुन्दर वाणी] हो ॥२०॥
भावार्थभाषाः - मनुष्यों को परमेश्वरोक्त ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद द्वारा श्रेष्ठ विद्याएँ प्राप्त करके इस जन्म और पर जन्म का सुख भोगना चाहिये ॥२०॥
टिप्पणी: २०−(एकर्चेभ्यः) म०१। एकस्य परमात्मनः स्तुत्या विद्या येषु वेदेषु तेभ्यः ॥