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ह॑रि॒तेभ्यः॒ स्वाहा॑ ॥

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

हरितेभ्यः। स्वाहा ॥२२.५॥

अथर्ववेद » काण्ड:19» सूक्त:22» पर्यायः:0» मन्त्र:5


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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी

महाशान्ति के लिये उपदेश।

पदार्थान्वयभाषाः - (हरितेभ्यः) स्वीकार करने योग्य [परमेश्वर के गुणों] के लिये (स्वाहा) स्वाहा [सुन्दर वाणी] हो ॥५॥
भावार्थभाषाः - स्पष्ट है ॥५॥
टिप्पणी: ५−(हरितेभ्यः) हृश्याभ्यामितन्। उ०३।९३। हृञ् स्वीकारे-इतन्। स्वीकरणीयेभ्यः परमेश्वरगुणेभ्यः ॥