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नी॑लन॒खेभ्यः॒ स्वाहा॑ ॥

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

नीलऽनखेभ्यः। स्वाहा ॥२२.४॥

अथर्ववेद » काण्ड:19» सूक्त:22» पर्यायः:0» मन्त्र:4


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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी

महाशान्ति के लिये उपदेश।

पदार्थान्वयभाषाः - (नीलनखेभ्यः) निश्चित ज्ञान प्राप्त करानेवाले [परमेश्वर के गुणों] के लिये (स्वाहा) स्वाहा [सुन्दर वाणी] हो ॥४॥
भावार्थभाषाः - स्पष्ट है ॥४॥
टिप्पणी: ४−(नीलनखेभ्यः) नि+इल गतौ-क+णख गतौ-क। इला वाङ्नाम-निघ०१।११। नीलानां निश्चितज्ञानानां नखेभ्यः प्रापकेभ्यः परमात्मगुणेभ्यः ॥