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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
महाशान्ति के लिये उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (ब्रह्मणे) वेदज्ञान के लिये (स्वाहा) स्वाहा [सुन्दर वाणी] हो ॥२०॥
भावार्थभाषाः - मनुष्य वेदविद्या के उपदेश से परस्पर हित करते-कराते रहें ॥२०॥
टिप्पणी: २०−(ब्रह्मणे) वेदज्ञानाय ॥
