वांछित मन्त्र चुनें

ष॒ष्ठाय॒ स्वाहा॑ ॥

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

षष्ठाय। स्वाहा ॥२२.२॥

अथर्ववेद » काण्ड:19» सूक्त:22» पर्यायः:0» मन्त्र:2


0 बार पढ़ा गया

पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी

महाशान्ति के लिये उपदेश।

पदार्थान्वयभाषाः - (षष्ठाय) छठे [पृथिवी, जल, तेज, वायु, आकाश पञ्च भूतों की अपेक्षा छठे परमात्मा] के लिये (स्वाहा) स्वाहा [सुन्दर वाणी] हो ॥२॥
भावार्थभाषाः - पृथिव्यादि पञ्चभूतों के नियन्ता परमेश्वर की उपासना सब मनुष्य करें। अथर्व०८।९।४। भी देखो ॥२॥
टिप्पणी: २−(षष्ठाय) पृथिव्यादिपञ्चभूतापेक्षया षट्संख्यापूरकाय परमेश्वराय ॥