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पृ॑थक्स॒ह॒स्राभ्यां॒ स्वाहा॑ ॥

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

पृथक्ऽसहस्राभ्याम्। स्वाहा ॥२२.१९॥

अथर्ववेद » काण्ड:19» सूक्त:22» पर्यायः:0» मन्त्र:19


पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी

महाशान्ति के लिये उपदेश।

पदार्थान्वयभाषाः - (पृथक्सहस्राभ्याम्) पृथक्-पृथक् और सहस्रोंवाले दोनों [समूहों] के लिये (स्वाहा) स्वाहा [सुन्दर वाणी] हो ॥१९॥
भावार्थभाषाः - मनुष्य पृथक्-पृथक् होकर और सामाजिक समुदाय बनाकर हितकारी कर्म करें करावें ॥१९॥
टिप्पणी: १९−(पृथक्सहस्राभ्याम्) व्यक्तिजन्यसहस्रजन्याभ्यां समूहाभ्याम् ॥