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म॑हाग॒णेभ्यः॒ स्वाहा॑ ॥

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पद पाठ

महाऽगणेभ्यः। स्वाहा ॥२२.१७॥

अथर्ववेद » काण्ड:19» सूक्त:22» पर्यायः:0» मन्त्र:17


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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी

महाशान्ति के लिये उपदेश।

पदार्थान्वयभाषाः - (महागणेभ्यः) बड़े समूहों के लिये (स्वाहा) स्वाहा [सुन्दर वाणी] हो ॥१७॥
भावार्थभाषाः - स्पष्ट है ॥१७॥
टिप्पणी: १७−(महागणेभ्यः) महासमूहेभ्यः ॥