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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
महाशान्ति के लिये उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (महागणेभ्यः) बड़े समूहों के लिये (स्वाहा) स्वाहा [सुन्दर वाणी] हो ॥१७॥
भावार्थभाषाः - स्पष्ट है ॥१७॥
टिप्पणी: १७−(महागणेभ्यः) महासमूहेभ्यः ॥
