वांछित मन्त्र चुनें

शि॒खिभ्यः॒ स्वाहा॑ ॥

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

शिखिऽभ्यः। स्वाहा ॥२२.१५॥

अथर्ववेद » काण्ड:19» सूक्त:22» पर्यायः:0» मन्त्र:15


0 बार पढ़ा गया

पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी

महाशान्ति के लिये उपदेश।

पदार्थान्वयभाषाः - (शिखिभ्यः) शिखाधारियों [चोटी-वालों, अथवा चोटी-वाले पर्वतादि के समान ऊँचे ब्रह्मज्ञानियों] के लिये (स्वाहा) स्वाहा [सुन्दर वाणी] हो ॥१५॥
भावार्थभाषाः - स्पष्ट है ॥१५॥
टिप्पणी: १५−(शिखिभ्यः) व्रीह्यादिभ्यश्च। पा०५।२।११६। शिखा-इनि। शिखाधारिभ्यः, यद्वा शिखरयुक्तपर्वतादितुल्योन्नतेभ्यो ब्राह्मणेभ्यः ॥