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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
महाशान्ति के लिये उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (शिखिभ्यः) शिखाधारियों [चोटी-वालों, अथवा चोटी-वाले पर्वतादि के समान ऊँचे ब्रह्मज्ञानियों] के लिये (स्वाहा) स्वाहा [सुन्दर वाणी] हो ॥१५॥
भावार्थभाषाः - स्पष्ट है ॥१५॥
टिप्पणी: १५−(शिखिभ्यः) व्रीह्यादिभ्यश्च। पा०५।२।११६। शिखा-इनि। शिखाधारिभ्यः, यद्वा शिखरयुक्तपर्वतादितुल्योन्नतेभ्यो ब्राह्मणेभ्यः ॥
