0 बार पढ़ा गया
पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
महाशान्ति के लिये उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (ऋषिभ्यः) ऋषियों [वेदव्याख्याता मुनियों] के लिये (स्वाहा) स्वाहा [सुन्दर वाणी] हो ॥१४॥
भावार्थभाषाः - स्पष्ट है ॥१४॥
टिप्पणी: १४−(ऋषिभ्यः) वेदार्थदर्शकेभ्यो मुनिभ्यः ॥
