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ऋ॒षिभ्यः॒ स्वाहा॑ ॥

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

ऋषिऽभ्यः। स्वाहा ॥२२.१४॥

अथर्ववेद » काण्ड:19» सूक्त:22» पर्यायः:0» मन्त्र:14


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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी

महाशान्ति के लिये उपदेश।

पदार्थान्वयभाषाः - (ऋषिभ्यः) ऋषियों [वेदव्याख्याता मुनियों] के लिये (स्वाहा) स्वाहा [सुन्दर वाणी] हो ॥१४॥
भावार्थभाषाः - स्पष्ट है ॥१४॥
टिप्पणी: १४−(ऋषिभ्यः) वेदार्थदर्शकेभ्यो मुनिभ्यः ॥