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उ॑त्त॒रेभ्यः॒ स्वाहा॑ ॥

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

उत्ऽतरेभ्यः। स्वाहा ॥२२.१३॥

अथर्ववेद » काण्ड:19» सूक्त:22» पर्यायः:0» मन्त्र:13


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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी

महाशान्ति के लिये उपदेश।

पदार्थान्वयभाषाः - (उत्तरेभ्यः) अधिकतर ऊँचे [पुरुषों] के लिये (स्वाहा) स्वाहा [सुन्दर वाणी] हो ॥१–३॥
भावार्थभाषाः - स्पष्ट है ॥१–३॥
टिप्पणी: १३−(उत्तरेभ्यः) अधिकतरोन्नतपुरुषेभ्यः ॥