0 बार पढ़ा गया
पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
महाशान्ति के लिये उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (उत्तरेभ्यः) अधिकतर ऊँचे [पुरुषों] के लिये (स्वाहा) स्वाहा [सुन्दर वाणी] हो ॥१३॥
भावार्थभाषाः - स्पष्ट है ॥१३॥
टिप्पणी: १३−(उत्तरेभ्यः) अधिकतरोन्नतपुरुषेभ्यः ॥
