0 बार पढ़ा गया
पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
महाशान्ति के लिये उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (उपोत्तमेभ्यः) श्रेष्ठों के समीपवर्ती [ब्रह्मचारी आदि पुरुषों] के लिये (स्वाहा) स्वाहा [सुन्दर वाणी] हो ॥११॥
भावार्थभाषाः - स्पष्ट है ॥११॥
टिप्पणी: ११−(उपोत्तमेभ्यः) श्रेष्ठानां समीपवर्तिभ्यो ब्रह्मचार्यादिभ्यः ॥
