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उ॑पोत्त॒मेभ्यः॒ स्वाहा॑ ॥

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

उपऽउत्तमेभ्यः। स्वाहा ॥२२.११॥

अथर्ववेद » काण्ड:19» सूक्त:22» पर्यायः:0» मन्त्र:11


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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी

महाशान्ति के लिये उपदेश।

पदार्थान्वयभाषाः - (उपोत्तमेभ्यः) श्रेष्ठों के समीपवर्ती [ब्रह्मचारी आदि पुरुषों] के लिये (स्वाहा) स्वाहा [सुन्दर वाणी] हो ॥११॥
भावार्थभाषाः - स्पष्ट है ॥११॥
टिप्पणी: ११−(उपोत्तमेभ्यः) श्रेष्ठानां समीपवर्तिभ्यो ब्रह्मचार्यादिभ्यः ॥