वांछित मन्त्र चुनें
136 बार पढ़ा गया

दे॒वा अ॒मृते॒नोद॑क्रामं॒स्तां पुरं॒ प्र ण॑यामि वः। तामा वि॑शत॒ तां प्र वि॑शत॒ सा वः॒ शर्म॑ च॒ वर्म॑ च यच्छतु ॥

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

देवाः। अमृतेन। उत्। अक्रामन्। ताम्। पुरम्। प्र। नयामि। वः। ताम्। आ। विशत। ताम्। प्र। विशत। सा। वः। शर्म। वर्म। च। यच्छतु ॥१९.१०॥

अथर्ववेद » काण्ड:19» सूक्त:19» पर्यायः:0» मन्त्र:10


पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी

रक्षा के प्रयत्न का उपदेश।

पदार्थान्वयभाषाः - (देवाः) विद्वान् लोग (अमृतेन) अमरपन [पुरुषार्थ वा मोक्षसुख] के साथ (उत् अक्रामन्) ऊँचे चढ़े हैं, (ताम्) उस (पुरम्) अग्रगामिनी शक्ति....... [मन्त्र १] ॥१०॥
भावार्थभाषाः - विद्वान् लोग पुरुषार्थ करके उच्च पद पाते हैं, वैसे ही सब मनुष्य विद्वान् होकर उन्नति करते रहें ॥१०॥
टिप्पणी: १०−(देवाः) विद्वांसः (अमृतेन) अमरत्वेन। पुरुषार्थेन। मोक्षसुखेन। अन्यद् गतम् ॥