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समि॒मां मात्रां॑मिमीमहे॒ यथाप॑रं॒ न मासा॑तै। श॒ते श॒रत्सु॑ नो पु॒रा ॥

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

सम् । इमाम् । मात्राम् । मिमीमहे । यथा । अपरम् । न । मासातै । शते । शरत्ऽसु । नो इति । पुरा ॥२.४४॥

अथर्ववेद » काण्ड:18» सूक्त:2» पर्यायः:0» मन्त्र:44


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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी

मोक्ष के लिये प्रयत्न का उपदेश।

पदार्थान्वयभाषाः - (इमाम्) इस [वेदोक्त] (मात्राम्) मात्रा [मर्यादा] को (सम्) सब प्रकार (मिमीमहे) हम नापते हैं, (यथा)क्योंकि (अपरम्) अन्य प्रकार से [उस मर्यादा को, कोई भी] (न) नहीं (मासातै) नापसकता। (शते शरत्सु) सौ वर्षों में भी (पुरा) लगातार (नो) कभी नहीं ॥४४॥
भावार्थभाषाः - मन्त्र ३८ के समान॥४४॥
टिप्पणी: ४४−(सम्) सम्यक्। अन्यत् पूर्ववत्-म० ३८ ॥