0 बार पढ़ा गया
पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
मोक्ष के लिये प्रयत्न का उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (इमाम्) इस [वेदोक्त] (मात्राम्) मात्रा [मर्यादा] को (उत्) उत्तमता से (मिमीमहे) हम नापते हैं.... [मन्त्र ३८] ॥४३॥
भावार्थभाषाः - मन्त्र ३८ के समान॥४३॥
टिप्पणी: ४३−(उत्) उत्तमतया। अन्यत् पूर्ववत्-म० ३८ ॥
