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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
मोक्ष के लिये प्रयत्न का उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (इमाम्) इस [वेदोक्त] (मात्राम्) मात्रा [मर्यादा] को (वि) विशेष करके (मिमीमहे) हम नापते हैं.... [मन्त्र ३८] ॥४१॥
भावार्थभाषाः - मन्त्र ३८ के समान॥४१॥
टिप्पणी: ४१−(वि) विशेषेण। अन्यत् पूर्ववत्-म० ३८ ॥
