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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
मोक्ष के लिये प्रयत्न का उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (इमाम्) इस [वेदोक्त] (मात्राम्) मात्रा [मर्यादा] को (प्र) आगे बढ़कर (मिमीमहे) हम नापते हैं.... [मन्त्र ३८] ॥३९॥
भावार्थभाषाः - मन्त्र ३८ के समान॥३९॥
टिप्पणी: ३९−(प्र) प्रकर्षेण। अन्यत् पूर्ववत्-म० ३८ ॥
