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सुया॑मंश्चाक्षुष॥

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

सुऽयामन् । चाक्षुष: ॥७.७॥

अथर्ववेद » काण्ड:16» सूक्त:7» पर्यायः:0» मन्त्र:7


पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी

शत्रु के नाश करने का उपदेश।

पदार्थान्वयभाषाः - (सुयामन्) हे सुमार्गी ! (चाक्षुष) हे नेत्रवाले ! [विद्वान्] ॥७॥
भावार्थभाषाः - धर्मात्मा दूरदर्शीलोग कुमार्गी जन के कुल, माता, पिता आदि का पता लगाकर यथोचित दण्ड देवें ॥७, ८॥
टिप्पणी: ७−(सुयामन्) यागतौ-मनिन्। हे सुमार्गिन् (चाक्षुष) हे नेत्रवन्। दूरदर्शिन् ॥