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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
शत्रु के नाश करने का उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (द्विषन्तम्) वैरकरनेवाले [कुमार्गी] को (दिवः) आकाश से (निः) पृथक्, (पृथिव्याः) पृथिवी से (निः) पृथक् और (अन्तरिक्षात्) मध्यलोक से (निः भजाम) हम भागरहित करें ॥६॥
भावार्थभाषाः - शूर धर्मात्मा लोगदुराचारियों को आकाशमार्ग, पृथिवीमार्ग और अन्य मार्ग से सर्वथा निकाल देवें॥६॥
टिप्पणी: ६−(निः) पृथक् (द्विषन्तम्) वैरयन्तम् (दिवः) आकाशात् (निः) (पृथिव्याः)भूलोकात् (अन्तरिक्षात्) मध्यलोकात् (निर्भजाम) भागरहितं कुर्याम ॥
