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ए॒वाने॒वाव॒ साग॑रत् ॥

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

एव । अनेव । अव । सा । गरत् ॥७.४॥

अथर्ववेद » काण्ड:16» सूक्त:7» पर्यायः:0» मन्त्र:4


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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी

शत्रु के नाश करने का उपदेश।

पदार्थान्वयभाषाः - (एव) इस प्रकार से [अथवा] (अनेव) अन्य प्रकार से (सा) वह [न्यायव्यवस्था] [कुमार्गी को] (अव गरत्)निगल जावे ॥४॥
भावार्थभाषाः - राजा अपनी अनेक न्यायव्यवस्थाओं से दुष्टों का नाश करता रहे ॥४॥
टिप्पणी: ४−(एव) एवम्। अनेन प्रकारेण (अनेव)अनेवम्। अन्यप्रकारेण (सा) न्यायव्यवस्था (अव गरत्) विनाशयेत् ॥