वांछित मन्त्र चुनें

कु॒म्भीका॑दू॒षीकाः॒ पीय॑कान् ॥

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

कुम्भीका: । दूषीका: । पीयकान् ॥६.८॥

अथर्ववेद » काण्ड:16» सूक्त:6» पर्यायः:0» मन्त्र:8


0 बार पढ़ा गया

पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी

रोगनाश करने का उपदेश।

पदार्थान्वयभाषाः - (कुम्भीकाः)कुम्भीकाओं [रोग जिस में पेट बटलोही-सा बजता है], (दूषीकाः) दूषीकाओं [जिनरोगों में रोगी गिरता जाता है], (पीयकान्) अन्य दुःखदायी रोगों ॥८॥
भावार्थभाषाः - जो मनुष्य ईश्वरनियमको छोड़कर कुपथ्य करतेहैं, वे अनेक महाक्लिष्ट रोग भोगते हैं॥७-९॥
टिप्पणी: ८−(कुम्भीकाः)कुम्भी+कै शब्दे-क। कुम्भी उखेव कायन्ति शब्दायन्ते यासु ताः पीडाः (पीयकान्)पीयतिर्हिंसाकर्मा-निघ० ४।२५। क्वुन्। शिल्पिसंज्ञयोरपूर्वस्यापि। उ० २।३२।पीयति-क्वुन्। हिंसकान् रोगान् ॥