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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
आलस्यादिदोष के त्याग के लिये उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - तू (अन्तकः) अन्तकरनेवाला (असि) है और तू (मृत्युः) मृत्यु [के समान दुःखदायी] (असि) है ॥९॥
भावार्थभाषाः - मन्त्र १-३ के समान है॥८-१०॥
