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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
आयु की वृद्धि के लिये उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - [हे ईश्वर !] (प्राणः)प्राण [श्वास] (माम्) मुझे (मा हासीत्) न छोड़े, (मो) और न (अपानः) अपान [प्रश्वास] (अवहाय) छोड़कर (परा गात्) दूर जावे ॥३॥
भावार्थभाषाः - मनुष्य शरीर कीस्वस्थता के साथ आत्मबल बढ़ाते रहें ॥३॥
टिप्पणी: ३−(मा हासीत्) मा त्यजेत् (माम्)प्राणिनम् (प्राणः) श्वासः (मो) न च (अपानः) प्रश्वासः (अवहाय) परित्यज्य (परागात्) दूरे गच्छतु ॥
