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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
आयु की वृद्धि के लिये उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (अहम्) मैं (रयीणाम्)धनों की (नाभिः) नाभि [मध्यस्थान] और (समानानाम्) समान [तुल्यगुणी] पुरुषों की (नाभिः) नाभि (भूयासम्) हो जाऊँ ॥१॥
भावार्थभाषाः - जो मनुष्य विद्याधन औरसुवर्ण आदि धन के साथ गुणी मनुष्यों को प्राप्त होते हैं, वे संसार मेंप्रतिष्ठा पाते हैं ॥१॥
टिप्पणी: १−(नाभिः) मध्यस्थानम् (अहम्) पुरुषः (रयीणाम्)विद्यासुवर्णादिधनानाम् (नाभिः) (समानानाम्) सू० ३ म० १। तुल्यगुणवताम् (भूयासम्) भवेयम् ॥
