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मू॒र्धाहंर॑यी॒णां मू॒र्धा स॑मा॒नानां॑ भूयासम् ॥

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

मूर्धा । अहम्। रयीणाम् । मूर्धा । समानानाम् । भूयासम् ॥३.१॥

अथर्ववेद » काण्ड:16» सूक्त:3» पर्यायः:0» मन्त्र:1


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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी

आयु की वृद्धि के लिये उपदेश।

पदार्थान्वयभाषाः - (अहम्) मैं (रयीणाम्)धनों का (मूर्धा) सिर और (समानानाम्) समान [तुल्य गुणी] पुरुषों का (मूर्धा) सिर (भूयासम्) हो जाऊँ ॥१॥
भावार्थभाषाः - मनुष्य उद्योग करें किविद्याधन और सुवर्ण आदि धन से गुणी मनुष्यों को पाकर संसार में शरीर में मस्तकके समान मुखिया होवें ॥१॥
टिप्पणी: १−(मूर्धा) शिरः। मस्तकवत्प्रधानः (अहम्) (रयीणाम्) विद्यासुवर्णादिधनानाम् (मूर्धा) (समानानाम्) सम्+आङ्+णीञ् प्रापणे-ड तुल्यगुणवताम् (भूयासम्) ॥