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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
दुःख से छूटने का उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (तेन) उसी [पूर्वोक्तकारण] से (तम्) उस [अज्ञानी वैरी] को (अभ्यतिसृजामः) हम सर्वथा नाश करते हैं, (यः) जो [अज्ञानी] (अस्मान्) हम से (द्वेष्टि) द्वेष करता है और (यम्) जिस से (वयम्) हम (द्विष्मः) द्वेष करते हैं ॥५॥
भावार्थभाषाः - जो अधर्मी लोगधर्मात्माओं से अपनी दुष्टता के कारण वैर करें, अथवा धर्मात्मा लोग जिन्हें उनकेदुष्ट व्यवहार के कारण बुरा जानें, विद्वान् लोग उन दुराचारियों को प्रयत्नपूर्वक नाश करें ॥५॥
टिप्पणी: ५−(तेन) पूर्वोक्तेन कारणेन (तम्) अज्ञानिनं शत्रुम् (अभ्यतिसृजामः) म० ४। सर्वतो विनाशयामः (यः) अज्ञानी (अस्मान्) धार्मिकान् (द्वेष्टि) बाधते (यम्) अज्ञानिनम् (वयम्) धार्मिकाः (द्विष्मः) बाधामहे ॥
