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अ॑रि॒प्रा आपो॒अप॑ रि॒प्रम॒स्मत् ॥

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

अरिप्रा: । आप: । अप । रिप्रन् । अस्मत् ॥१.१०॥

अथर्ववेद » काण्ड:16» सूक्त:1» पर्यायः:0» मन्त्र:10


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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी

दुःख से छूटने का उपदेश।

पदार्थान्वयभाषाः - (अरिप्राः) निर्दोष (आपः) विद्वान् लोग (रिप्रम्) पाप को (अस्मत्) हम से (अप) दूर [पहुँचावें] ॥१०॥
भावार्थभाषाः - मनुष्य विद्वानों केसत्सङ्ग और शिक्षा से जागते-सोते कभी पाप कर्म का विचार न करें ॥१०, ११॥
टिप्पणी: १०−(अरिप्राः)निर्दोषाः (आपः) म० ८। विपश्चितः (अप) दूरे (रिप्रम्) पापम् (अस्मत्) ॥