वांछित मन्त्र चुनें

स वि॒शोऽनु॒व्यचलत् ॥

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

स: । विश: । अनु । वि । अचलत् ॥९.१॥

अथर्ववेद » काण्ड:15» सूक्त:9» पर्यायः:0» मन्त्र:1


0 बार पढ़ा गया

पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी

राजधर्मकी व्यवस्था का उपदेश।

पदार्थान्वयभाषाः - (सः) वह [व्रात्यपरमात्मा] (विशः अनु) मनुष्यों की ओर (वि अचलत्) विचरा ॥१॥
भावार्थभाषाः - सर्वव्यापक परमात्माने वेदद्वारा मनुष्यों में राजधर्म का उपदेश किया है ॥१॥
टिप्पणी: १−(सः) व्रात्यःपरमात्मा (विशः) मनुष्यान् (अनु) अनुलक्ष्य अन्यत् पूर्ववत् ॥