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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
राजधर्मकी व्यवस्था का उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (सः) वह [व्रात्यपरमात्मा] (विशः अनु) मनुष्यों की ओर (वि अचलत्) विचरा ॥१॥
भावार्थभाषाः - सर्वव्यापक परमात्माने वेदद्वारा मनुष्यों में राजधर्म का उपदेश किया है ॥१॥
टिप्पणी: १−(सः) व्रात्यःपरमात्मा (विशः) मनुष्यान् (अनु) अनुलक्ष्य अन्यत् पूर्ववत् ॥
