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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
परमात्माके अन्तर्यामी होने का उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (तस्मै) उस [विद्वान्]के लिये (उदीच्याः दिशः) उत्तर दिशा के (अन्तर्देशात्) मध्यदेश से (उग्रम्)प्रचण्ड स्वभाववाले (देवम्) प्रकाशमय परमात्मा को (इष्वासम्) हिंसा हटानेवाला, (अनुष्ठातारम्) साथ रहनेवाला (अकुर्वन्) उन [विद्वानों] ने बनाया ॥८॥
भावार्थभाषाः - मन्त्र १-३ के समान है॥८, ९॥
टिप्पणी: ८, ९−(उदीच्याः)उत्तरायाः (उग्रम्) प्रचण्डस्वभावम् (देवम्) प्रकाशमयम्। अन्यत् पूर्ववत् स्पष्टंच ॥
