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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
परमात्माके अन्तर्यामी होने का उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (तस्मै) उस [विद्वान्]के लिये (प्रतीच्याः दिशः) पश्चिम दिशा के (अन्तर्देशात्) मध्य देश से (पशुपतिम्) प्राणियों के रक्षक परमात्मा को (इष्वासम्) हिंसा हटानेवाला (अनुष्ठातारम्) साथ रहनेवाला (अकुर्वन्) उन [विद्वानों] ने बनाया ॥६॥
भावार्थभाषाः - मन्त्र १-३ के समान है॥६, ७॥
टिप्पणी: ६, ७−(प्रतीच्याः)पश्चिमायाः (पशुपतिम्) प्राणिनां रक्षकम् (पशुपतिः) प्राणिनां रक्षकः। अन्यत्पूर्ववत् ॥
