0 बार पढ़ा गया
पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
परमात्माके अन्तर्यामी होने का उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - मन्त्र १-३ के समान है॥४-५॥(तस्मै) उस [विद्वान्]के लिये (दक्षिणायाः दिशः) दक्षिण दिशा के (अन्तर्देशात्) मध्य देश से (शर्वम्)दुःखनाशक परमात्मा को (इष्वासम्) हिंसानिवारक, (अनुष्ठातारम्) साथ रहनेवाला (अकुर्वन्) उन [विद्वानों] ने बनाया ॥४॥
टिप्पणी: ४, ५−स्पष्टंपूर्ववच्च ॥
