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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
परमेश्वर के रक्षा गुण का उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (तस्मै) उस [विद्वान्]के लिये (प्रतीच्याः दिशः) पश्चिमी दिशा से ॥७॥
भावार्थभाषाः - मन्त्र १-३ के समान है॥७-९॥
टिप्पणी: ७−(तस्मै) विदुषे (प्रतीच्याः) पश्चिमायाः (दिशः) ॥
