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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
परमेश्वर के रक्षा गुण का उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (तस्मै) उस [विद्वान्]के लिये (दक्षिणायाः दिशः) दक्षिण दिशा से ॥४॥
भावार्थभाषाः - मन्त्र १-३ के समान है॥४-६॥
टिप्पणी: ४-स्पष्टम् ॥
