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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
परमेश्वर के रक्षा गुण का उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (शैशिरौ) शिशिरवाले [पतझड़वाले, माघ-फाल्गुन] (मासौ) दो महीनों को (गोप्तारौ) दो रक्षक (अकुर्वन्)उन [विद्वानों] ने बनाया, (दिवम्) आकाश (च च) और (आदित्यम्) सूर्य को (अनुष्ठातारौ) दो अनुष्ठाता [साथ रहनेवाले वा कार्यसाधक] [बनाया] ॥१७॥
भावार्थभाषाः - मन्त्र १-३ के समान है॥१६-१८॥
टिप्पणी: १७, १८−(शिशिरौ) शिशिरअण्। शिशिरसम्बन्धिनौ माघफाल्गुनौ (दिवम्) आकाशम् (आदित्यम्) आदीप्यमानंसूर्यम्। अन्यद् गतम् ॥
