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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी
परमेश्वर के रक्षा गुण का उपदेश।
पदार्थान्वयभाषाः - (तस्मै) उस [विद्वान्]के लिये (ऊर्ध्वायाः दिशः) ऊँची दिशा से ॥१६॥
भावार्थभाषाः - मन्त्र १-३ के समान है॥१६-१८॥
टिप्पणी: १६−(तस्मै) (ऊर्ध्वायाः) उन्नतायाः ॥
