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तस्मै॑ध्रु॒वाया॑ दि॒शः ॥

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

तस्मै । ध्रुवाया: । दिश: ॥४.१३॥

अथर्ववेद » काण्ड:15» सूक्त:4» पर्यायः:0» मन्त्र:13


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पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी

परमेश्वर के रक्षा गुण का उपदेश।

पदार्थान्वयभाषाः - (तस्मै) उस [विद्वान्]के लिये (ध्रुवायाः दिशः) नीची दिशा से ॥१३॥
भावार्थभाषाः - मन्त्र १-३ के समान है॥१३-१५॥
टिप्पणी: १३−(तस्मै) (ध्रुवायाः) अधोभवायाः (दिशः) ॥१३॥